Thursday, 16 January 2014

                         टोपी से कुर्सी तक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की टोपी का नशा हर पार्टी के सिर चढ़ कर बोलने लगा है। टोपी का नशा कुछ इस कदर है मानो हर पार्टी इसे अपनी जीत की ओर जाने वाली सीढ़ी समझ रही है। टोपी की शुरूआत तो एक अरसे पहले महात्मा गाँधी ने करी थी इसके बाद इस टोपी को पं जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई से लेकर तमाम बड़े नेताओं ने पहना। लेकिन वक्त के साथ साथ टोपी कहीं गायब होती चली गयी। वक्त बदला, नेता बदले, लोग बदले और बदल गया वह दौर जब टोपी नेताओं की शान हुआ करती थी। यह दौर था आजादी के करीब 50-60 साल के बाद का दौर, इस दौर में नेता टोपी को भूल चुके थे। कुछ नेता तो इस टोपी को धर्म से भी जोड़कर देखने लगे थे, सादगी और भाईचारे से हटकर इस टोपी को जाति और मजहब से जोड़ दिया गया। पर कभी ना थमने वाले वक्त ने एक बार फिर से करवट ली और शुरू हो गया अन्ना हजारे का दौर। तमाम लोग अन्ना में गाँधी की छवि देखने लगे, ये वह दौर था जब देश ने दूसरी दफा आजादी की जंग लड़ी। पूरा देश ऐसे एकजुट हो गया जैसे आजादी के वक्त हुआ था ये द़श्य युवा पीढ़ी ने इससे पहले कभी नहीं देखा था। ये किसी सपने से कम नहीं था कि एक साधारण से दिखने वाले व्यक्ति ने पूरे देश में बदलाव की एक ऐसी चिंगारी को जन्म दिया था जो शायद बुझने वाली नहीं है। उस वक्त अन्ना ने गाँधी टोपी पहनी थी, जिस पर लिखा था मैं अन्ना हूँ। अन्ना के आन्दोलन के बाद अब बारी थी केजरीवाल की, अन्ना हजारे से खुद को अलग करने के बाद केजरीवाल राजनीति में कूद पड़े। चुनाव प्रचार में विभिन्न तरीकों से पार्टी का प्रचार किया जिसमें सबसे महत्वपूर्ण तरीका था टोपी से प्रचार का, ये तरीका रंग भी लाया और केजरीवाल मुख्यमंत्री भी बने। पर वक्त के साथ साथ ये टोपी भी बदलती रही, सबसे पहले टोपी पे लिखा था मुझे चाहिये स्वराज, उसके बाद आया मैं हूँ आम आदमी, फिर आया मुझे चाहिये पूरी आजादी, और अन्त में आया मुझे चाहिये स्वराज। वक्त के साथ टोपियाँ बदलती रहीं पर टोपी का असर लगातार बढ़ता गया। 


यही कारण है कि देश के बड़े राजनीतिक दल टोपी पहनाने में लगे हुये हैं। चाहें कांग्रेस हो या बीजेपी सब में टोपी का क्रेज बढ़ता चला जा रहा है, यही नहीं अब तो सपा और बसपा भी इसके रंग से अछूते नहीं हैं। लोग कभी भगवा रंग की टोपी पहनते हैं कभी नीली तो कभी सफेद,अंग्रजी में कहें तो शायद टोपी पहनना एक ट्रेन्ड बन गया है हर पार्टी यही सोच रही है कि शायद यही टोपी उसे सत्ता की कुर्सी तक पहुँचा दे। 


1 comment:

  1. vah jee vah sare log maidaan men behtarin paari lete hue aa rahe hain. badhayian

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