गुमनाम सितारे
आज सुबह ऑफिस में आते ही पता चला कि हम सब के फेवरेट चाचा चौधरी को बनाने वाले प्राण शर्मा इस दुनिया में नहीं रहे। कैंसर के चलते उनका निधन हो गया। फेसबुक और ट्वीटर पर लोगों का श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया। ऐसा लगता है कि यह भी लोगों के शौक में ही शुमार हो गया है। बस इधर कोई मरा नहीं और उधर श्रद्धांजलि देना शुरू। मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, यह अच्छा भी है कम से कम इसके माध्यम से आप अपनी संवेदनाओं को व्यक्त कर सकते हैं। पर आज से पहले हममें से कितने लोगों को पता था कि प्राण जी कौन हैं, कहां हैं और हैं भी या नहीं? इसे विडम्बना ही कहेंगें कि इतनी काबिल, ना कि मशहूर हस्ती का हमारे बीच होने का हमें पता ही नहीं था। ऐसा सिर्फ हमारे भारत में ही हो सकता है। किसी कलाकार के मरने के बाद उसके बारे में पता चलना यह कोई नई बात नहीं है। क्यों हमारा समाज और हम एक कलाकार को अक्सर भूल जाते हैं। उसकी कला से हमें बहुत प्यार हो जाता है पर कलाकार को हम जानते ही नहीं। क्यों हम इतने अंवेदनशील हो गए हैं। क्या इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार है या फिर यह सरकार की भी कहीं ना कहीं जिम्मेदारी होती है कि कम से कम भारत के नगीनों को उनके काम के अनुसार सम्मान दिया जाए। प्राण जी के मरने पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी श्रद्धांजलि दी। अब आप इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि प्राण जी का जाना देश के लिए कितनी बड़ी क्षति थी या वह देश के लिए कितना मायने रखते थे। लेकिन अगर सच में वह हमारे लिए इतने ही अज़ीज होते तो क्या हमें उनके जिन्दा होने का कभी एहसास ही नहीं होता। यह सिर्फ प्राण जी की बात नहीं है बल्कि बॉलीवुड ने भी इसे कई बार करीब से महसूस किया है। प्राण जी को मेरा सलाम जिन्होंने बचपन में मुझे चाचा चौधरी के ज़रिये ना जाने कितने बाद हंसाया है। आज एक बार फिर याद आया कि उस वक्त अखबार वाले से मंगा-मंगा कर ना जाने कितनी कॉमिक्स इक्ट्ठी करी थीं। पता नहीं आज वो सब कहां होंगी।
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